Posts

Showing posts with the label सच्चा नारीवाद

झूठे फेमिनिज़्म से सच्चे नारीवाद तक

समाज में आज जिस शब्द ने सबसे अधिक भ्रम पैदा किया है, वह है फेमिनिज़्म। स्त्रियों के अधिकार, उनके सम्मान और उनके आत्मनिर्भर जीवन की चर्चा होते ही कई बार यह आंदोलन अपने वास्तविक उद्देश्य से भटकता हुआ दिखाई देता है। कुछ लोग इसे स्त्री और पुरुष के बीच संघर्ष या प्रतिस्पर्धा का हथियार बना देते हैं, जबकि इसकी मूल भावना स्त्री को उसके स्वाभाविक अधिकार दिलाने और समाज में समान स्थान प्रदान करने की थी। दुर्भाग्य से आज “झूठा फेमिनिज़्म” उसी महान विचारधारा पर प्रश्नचिह्न लगाता है। झूठा फेमिनिज़्म वह है जिसमें स्त्री को स्वतंत्रता के नाम पर उसके कर्तव्यों से विमुख किया जाने लगता है। जहाँ परिवार और रिश्तों को बोझ समझा जाने लगे, जहाँ त्याग और प्रेम को कमजोरी माना जाए, और जहाँ स्त्री को केवल पुरुष से बराबरी करने के लिए उकसाया जाए, वहीं पर यह आंदोलन अपने रास्ते से भटक जाता है। यह झूठा फेमिनिज़्म स्त्री को यह समझाने की कोशिश करता है कि यदि वह अपने पति के लिए जल्दी उठकर चाय बना रही है तो वह “ग़ुलाम” है, लेकिन यदि वही स्त्री दफ़्तर जाने के लिए अलार्म लगाकर जल्दी उठती है तो वह “आधुनिक और स्वतंत्र” कहलाती ह...